नए Emission Norms 2030: गाड़ियों की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा
भारत में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है और इसका सबसे बड़ा कारण परिवहन क्षेत्र यानी गाड़ियां है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने लगातार सख्त Emission Norms लागू कर रही है ताकि वाहनों से निकलने वाला दुआ काम हो और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। अब 2030 से भारत में लागू होने वाले Emission Norms ने एक बार फिर से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में हलचल मचा दी हैI
यह नए नियम न सिर्फ पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की कीमतों को प्रभावित करेंगे बल्कि कर बाइक और ट्रक निर्माता को भी अपनी तकनीकी में बड़े बदलाव करने होंगे। इसका असर अब आम उपभोक्ता कीजिए से लेकर पूरे वाहन बाजार तक सांप दिखाई देगा वह मेरा भाई यह जानते हैं विस्तार से की Emission Norms 2030 क्या है,और इसे गाड़ियों की कीमत पर कैसा असर पड़ सकता है।
Emission Norms क्या होते हैं?
Emission Norms ऐसे में मानक स्टैंडर्ड होते हैं जिन्हें सरकार वाहनों से निकलने वाले दुबे को नियंत्रित करने के लिए तय करती है। इन का मकसद यानी सुनिश्चित करना होता है कि इंजन से निकलने वाली गैसों जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड नाइट्रोजन ऑक्साइड पार्टिकुलेट मैटर आदि की मात्रा सीमित हो।
भारत में पहले बस भारत स्टेज नॉन लागू थे जैसे bs-IV 2017 bs-VI 2020 I अब सरकार 2030 तक BS-VII या Bharat Stage 7 Norms लागू करने की योजना बना रही है जो यूरोपीय मानक यूरो-7 के बराबर होंगे I
नए Emission Norms 2030 में क्या होगा और क्या असर पड़ेगा
2030 के Emission Norms मैं वाहनों की तकनीक और अधिक सटीक पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा इसमें निम्नलिखित बदलाव प्रस्तावित हैI
- इंजन से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस की सीमा और घटाई जाएगी I
- पार्टिकुलेट मैटर पीएम 2.5 पर और सख्त नियंत्रण होगा।
- हर वाहन में रियल टाइम एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम RDE जरूरी होगा।
- इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वालों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए नए मानक लागू होंगे।
इसका मतलब यहां हुआ कि कर कंपनियों को नए इंजन डिजाइन करने होंगे और उनमें एडवांस्ड कंट्रोल सिस्टम लगाना होगा।
गाड़ियों की कीमतों का असर
नए नियम लागू होने के बाद गाड़ी की मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ेगी क्योंकि कंपनी को इंजन में नहीं टेक्नोलॉजी और सेंसर लगाने होंगे इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।
| वाहन श्रेणी | मौजूदा कीमत (2025 अनुमान) | 2030 के बाद अनुमानित कीमत | कीमत में वृद्धि |
| पेट्रोल कार | ₹6 – ₹10 लाख | ₹7 – ₹11.5 लाख | ₹1 – ₹1.5 लाख तक |
| डीज़ल कार | ₹9 – ₹15 लाख | ₹10.5 – ₹17 लाख | ₹1.5 – ₹2 लाख तक |
| बाइक / स्कूटर | ₹80,000 – ₹1.5 लाख | ₹90,000 – ₹1.7 लाख | ₹10,000 – ₹20,000 तक |
| ट्रक / बस | ₹25 – ₹40 लाख | ₹28 – ₹45 लाख | ₹3 – ₹5 लाख तक |
जैसा कि देखा जा सकता है तकनीकी सुधार के चलते वाहनों की कीमत में 10 से 15% तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है I
EV इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
नए Emission Norms 2030 का सबसे बड़ा फायदा इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा चुकी EVs में इंजन नहीं होता और दुआ नहीं निकलता इसलिए उन पर इन नियमों का असर नहीं पड़ेगाI
सरकार चाहती है कि 2030 तक भारत ने बिकने वाली 30% वहां इलेक्ट्रिक हो जाए इसके लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जा रहा है और सब्सिडी भी जा रही है। इसलिए पेट्रोल या डीजल कर खरीदने वालों को जहां कीमत बढ़ोतरी झेलनी पड़ेगी वहीं EV खरीदारों को टैक्स छूट और सरकारी प्रोत्साहन का भी लाभ मिलेगा।
माइलेज पर असर और इंजन तकनीक
Emission Norms के तहत इंजन में ज्यादा सेंसर कैटालिटिक कन्वर्टर और डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर जैसी चीज लगानी होगी इससे गाड़ियां पहले से ज्यादा सांप और नियंत्रण उत्सर्जन देगी।
हालांकि इन बदलाव से इंजन पर थोड़ा लोड बढ़ सकता है जिससे माइलेज पास से 8% तक काम हो सकता है I
उदाहरण के लिए जो पेट्रोल कर 18 किलोमीटर देती थी वहां नए नॉर्म्स के बाद लगभग 16.5 से लेकर 17 किलोमीटर पर लीटर तक दे सकती है I
लेकिन कंपनियां इसका समाधान हाइब्रिड सिस्टम और स्मार्ट टॉप टेक्नोलॉजी के जरिए निकालने की कोशिश करेगी।
प्रभाव उद्योग पर
ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए यह बदलाव बड़ी चुनौती है। कंपनियों को नए इंजन और कॉम्पोनेंट्स के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर भारी निवेश करना होगाI
छोटी कंपनियां जो केवल लो कॉस्ट वाहनों पर निर्भर है उन्हें बाजार में टिके रहने के लिए मुश्किल हो सकती है।
हालांकि इससे दीर्घकाल में भारत की गाड़ियां की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में सुधार होगा।
- नीति और सरकार की भूमिका
- सरकार का उद्देश्य केवल प्रदूषण घटना नहीं बल्कि भारत को ग्रीन मोबिलिटी की ओर ले जाना है भी है इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारी मिलकर काम कर रही है।
- EV चार्जिंग स्टेशन बढ़ा रही है
- पुरानी गाड़ियों की स्क्रेपिंग पॉलिसी लागू कर रही है
- RDE और bs7 के लिए मैन्युफैक्चरिंग गाइडलाइन तैयार कर रही है
संभव है कि सरकार शुरुआती कुछ वर्षों के लिए टैक्स रियायत दे सकती है ताकि वाहन निर्माता नहीं तकनीक अपनाने में आसानी महसूस करें।
कौन सी कंपनियां तैयार है ?
भारत में कुछ कंपनियां पहले से ही 2030 के लिए तैयारियां शुरू कर चुकी है
- टाटामोटर
- मारुति सुजुकी
- हुंडई और KIA
- महिंद्रा
इन कंपनियों का उद्देश्य है कि वह 2030 तक जीरो एमिशन व्हीकल की रेस में सबसे आगे रहे I
निष्कर्ष
2030 के नए एडमिशन फॉर्म भारत की गाड़ियों को और पर्यावरण अनुकूल बढ़ाया लेकिन इसका सीधा असर वाहनों की कीमतों पर पड़ेगा I
पेट्रोल और डीजल गाड़ियां थोड़ी महंगी होगी जबकि इलेक्ट्रिक वाहन का योग और मजबूत होगा।
अगर आप 2029 के बाद नई गाड़ी खरीदने की सोच रहे तो बेहतर होगा कि EV आपया Hybrid विकल्पों का विचार करें I
क्योंकि आने वाले समय में न सिर्फ पेट्रोल महंगा होगा बल्कि क्लीन टेक्नोलॉजी गाड़ियां ही सड़क पर टिक पाएंगे I
